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Bihar Circle Rate 2026: पटना में जमीन की नई सरकारी दर लागू, सगुना मोड़ में 60 गुना तक बढ़ी कीमत

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बिहार में नई सर्किल रेट लागू होने के बाद पटना के कई प्रमुख इलाकों में जमीन की सरकारी कीमतों में बड़ा बदलाव हुआ है। बोरिंग रोड, डाकबंगला और सगुना मोड़ समेत कई क्षेत्रों में नई दरें लागू।

पटना/आलम की खबर: बिहार में जमीन और फ्लैट खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में नई सर्किल रेट व्यवस्था लागू कर दी गई है। नई सरकारी दरों के लागू होने के बाद राजधानी पटना समेत पूरे राज्य में जमीन की रजिस्ट्री अब पहले से महंगी हो जाएगी। खासकर पटना के प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय इलाकों में जमीन की सरकारी कीमतों में कई गुना तक बढ़ोतरी की गई है।

नई सर्किल रेट लागू होने के बाद जमीन की खरीद-बिक्री के दौरान दस्तावेजों में दर्ज सरकारी मूल्य बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क पर पड़ेगा। प्रशासन ने क्षेत्र के विकास, सड़क सुविधाओं, बाजार विस्तार और जमीन की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए नई दरें निर्धारित की हैं।

राजधानी पटना के कई ऐसे इलाके हैं, जहां पिछले कुछ वर्षों में जमीन की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। बोरिंग रोड, डाकबंगला चौराहा, फ्रेजर रोड, गांधी मैदान, अशोक राजपथ, एक्जीबिशन रोड और खाजपुरा जैसे इलाकों में नई सर्किल रेट सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।

बोरिंग रोड और डाकबंगला में 80 लाख रुपये प्रति डिसमिल तक सरकारी दर

नई सर्किल रेट के अनुसार पटना के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में जमीन की सरकारी कीमत 80 लाख रुपये प्रति डिसमिल तक निर्धारित की गई है।

बोरिंग रोड में वर्ष 2010 के आसपास सरकारी दर करीब 5 लाख रुपये प्रति डिसमिल थी, जो अब बढ़कर 80 लाख रुपये प्रति डिसमिल तक पहुंच गई है।

इसी तरह डाकबंगला चौराहा, फ्रेजर रोड, एक्जीबिशन रोड और अशोक राजपथ जैसे क्षेत्रों में भी जमीन की सरकारी कीमत 80 लाख रुपये प्रति डिसमिल तक तय की गई है।

इन इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां, बाजार विस्तार और बेहतर सड़क संपर्क के कारण जमीन की मांग लगातार बढ़ी है।

सगुना मोड़ में सबसे बड़ी बढ़ोतरी

नई सर्किल रेट में सबसे ज्यादा चर्चा सगुना मोड़ क्षेत्र की हो रही है। यहां जमीन की सरकारी कीमतों में सबसे बड़ा उछाल दर्ज किया गया है।

वर्ष 2010 में सगुना मोड़ इलाके में जमीन की सरकारी दर करीब 1 लाख रुपये प्रति डिसमिल थी, जो अब बढ़कर करीब 60 लाख रुपये प्रति डिसमिल पहुंच गई है।

यानी इस क्षेत्र में सरकारी दरों में लगभग 60 गुना तक वृद्धि हुई है। सड़क विस्तार, नए आवासीय प्रोजेक्ट, पटना शहर के फैलाव और आसपास के क्षेत्रों में विकास कार्यों को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है।

प्रमुख इलाकों की नई सर्किल रेट

पटना के प्रमुख क्षेत्रों में लागू नई सरकारी दर इस प्रकार है:

बोरिंग रोड: पुरानी दर - 5 लाख रुपये प्रति डिसमिल

नई दर - 80 लाख रुपये प्रति डिसमिल

डाकबंगला चौराहा: पुरानी दर - 5.50 लाख रुपये प्रति डिसमिल

नई दर - 80 लाख रुपये प्रति डिसमिल

फ्रेजर रोड/एक्जीबिशन रोड: पुरानी दर - 5.50 लाख रुपये प्रति डिसमिल

नई दर - 80 लाख रुपये प्रति डिसमिल

अशोक राजपथ: पुरानी दर - 5 लाख रुपये प्रति डिसमिल

नई दर - 80 लाख रुपये प्रति डिसमिल

दीघा: पुरानी दर - 2.25 लाख रुपये प्रति डिसमिल

नई दर - 70 लाख रुपये प्रति डिसमिल

मीठापुर: पुरानी दर - 1.78 लाख रुपये प्रति डिसमिल

नई दर - 60 लाख रुपये प्रति डिसमिल

कंकड़बाग: पुरानी दर - 3.50 लाख रुपये प्रति डिसमिल

नई दर - 60 लाख रुपये प्रति डिसमिल

अनिसाबाद: पुरानी दर - 2.30 लाख रुपये प्रति डिसमिल

नई दर - 60 लाख रुपये प्रति डिसमिल

राजाबाजार: पुरानी दर - 3 लाख रुपये प्रति डिसमिल

नई दर - 60 लाख रुपये प्रति डिसमिल

पुरंदरपुर: पुरानी दर - 2.53 लाख रुपये प्रति डिसमिल

नई दर - 60 लाख रुपये प्रति डिसमिल

खाजपुरा: नई दर - 80 लाख रुपये प्रति डिसमिल तक

आवासीय इलाकों में भी बढ़ी सरकारी कीमत

नई सर्किल रेट में आवासीय क्षेत्रों को भी अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।

डाकबंगला क्षेत्र में आवासीय सहायक सड़क की नई दर करीब 60 लाख रुपये प्रति डिसमिल निर्धारित की गई है।

फ्रेजर रोड में भी आवासीय सहायक सड़क की दर 60 लाख रुपये प्रति डिसमिल रखी गई है।

बोरिंग रोड में यह दर करीब 41 लाख रुपये प्रति डिसमिल है।

मीठापुर, अनिसाबाद, कंकड़बाग, राजाबाजार और दीघा में आवासीय सहायक सड़क की नई दर करीब 40 लाख रुपये प्रति डिसमिल तक पहुंच गई है।

पुरंदरपुर में यह दर करीब 35 लाख रुपये प्रति डिसमिल और सगुना मोड़ में करीब 35 लाख रुपये प्रति डिसमिल निर्धारित की गई है।

फ्लैट खरीदना भी होगा महंगा

नई सर्किल रेट का असर केवल जमीन पर नहीं बल्कि फ्लैट खरीदने वालों पर भी पड़ेगा।

नई व्यवस्था के तहत फ्लैटों की सरकारी कीमत 5,500 रुपये से लेकर 11,500 रुपये प्रति वर्ग फीट तक निर्धारित की गई है।

प्रीमियम इलाकों में फ्लैट की रजिस्ट्री कराने के लिए अधिक सरकारी मूल्य दिखाना होगा, जिससे स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में भी बढ़ोतरी होगी।

पांच श्रेणियों में बांटी गई शहरी जमीन

सरकार ने शहरी क्षेत्रों की जमीन को पांच मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया है।

इसमें व्यावसायिक प्रधान सड़क, व्यावसायिक मुख्य सड़क, व्यावसायिक सहायक सड़क, आवासीय मुख्य सड़क और आवासीय सहायक सड़क शामिल हैं।

वहीं ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में जमीन को नौ अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर दरें तय की गई हैं।

जमीन खरीदने वालों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

नई सर्किल रेट से सरकार को राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद है। वहीं जमीन खरीदने वालों को अब अधिक खर्च करना पड़ेगा।

जमीन की सरकारी कीमत बढ़ने से रजिस्ट्री के समय लगने वाली फीस भी बढ़ जाएगी। खासकर मध्यम वर्ग के खरीदारों पर इसका असर पड़ सकता है।

हालांकि प्रशासन का कहना है कि नई दरों से जमीन बाजार में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक मूल्य के करीब सरकारी रिकॉर्ड तैयार होंगे।

तेजी से बदल रहा पटना का जमीन बाजार

पिछले एक दशक में पटना और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से शहरी विकास हुआ है। एम्स पटना, जीरो माइल, संपतचक, पहाड़ी, ट्रांसपोर्ट नगर, बिहटा और नौबतपुर जैसे क्षेत्रों में भी जमीन की मांग बढ़ी है।

बेहतर सड़क नेटवर्क, नए प्रोजेक्ट और बढ़ती आबादी के कारण इन इलाकों में जमीन के भाव लगातार बढ़ रहे हैं।

नई सर्किल रेट लागू होने के बाद आने वाले समय में रियल एस्टेट बाजार में इसका असर देखने को मिलेगा।

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